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मेरी अयोध्या श्री राम धाम यात्रा : मेरा अनुभव अयोध्या धाम यात्रा से लौटकर वरिष्ठ पत्रकार ओम प्रकाश चौहान ग्रेटर नोएडा

हरवीर सिंह 9718976101

मेरी अयोध्या श्री राम धाम यात्रा मेरा अनुभव
अयोध्या धाम यात्रा से लौटकर ओम प्रकाश चौहान ग्रेटर नोएडा

पर्यटक स्थल श्री स्वामीनारायण मंदिर छपिया

साल 2024 में जरूर करें स्‍वामीनारायण के इस मंदिर के दर्शन
साल 2024 की दस्‍तक को अब कुछ ही दिन बाकी हैं तो आपने भी नए साल की बेहतर शुरुआत की तैयारियां कर ही ली होंगी। या फिर अभी प्‍लान कर रहे होंगे। अगर आप भी किसी उत्‍तर प्रदेश के किसी मंदिर में दर्शन करके इस दिन की शुरुआत करना चाहते हैं तो आप गोंडा के छपिया जा सकते हैं। यहां पर स्‍थापित स्‍वामीनारायण मंदिर अद्भुत है। देश के कोने-कोने से लोग यहां पर दर्शनों के लिए आते हैं। बता दें कि यह मंदिर देश में कई जगहों पर स्‍थापित है।

स्‍वामीनारायण के इस मंदिर के दर्शन
11 वर्ष की आयु में की तीर्थ यात्राओं की शुरुआत

छपिया में बने स्‍वामीनारायण मंदिर के बारे में जानने से पहले आइए जानते हैं कि कौन थे स्‍वामीनारायण। बता दें कि पद्मपुराण, स्‍कंदपुराण और भागवत पुराण में स्‍वामीनारायण के अवतार का संकेत मिलता है। भगवान स्‍वामीनारायण का मनुष्‍य रूप में 1781 में गोंडा के छपिया में जन्‍म हुआ था। बहुत कम उम्र में ही उन्‍होंने शास्‍त्रों की शिक्षा ले ली थी। इसके बाद 11 साल की उम्र में उन्‍होंने भारत में अपनी 7 साल की तीर्थ यात्रा शुरू की।

ऐसे ली शिक्षा और बन गए स्‍वामी सहजानंद
तीर्थस्‍थलों की यात्रा के पास नीलकंठवर्णी मंगरोल के पास लोज गांव पहुंचे। वहीं उनकी मुलाकात स्‍वामी रामानंद महराज से हुई। जितना स्‍वामीनारायण उनसे मिलने के लिए परेशान थे उतना ही स्‍वामी रामानंद भी। क्‍योंकि वह उन्‍हीं का इंतजार कर रहे थे। इस बारे में जिक्र मिलता है कि रामानंद भी अपनी कथाओं के दौरान भक्‍तों से कहते थे कि असली नट तो आने वाला है। वह तो केवल उसके आने से पहले का संदेश बांट रहे हैं। इसके बाद जब उनकी मुलाकात हुई नीलकंठवर्णी यानी कि स्‍वामीनारायण से तो उन्‍होंने उन्‍हें आश्रम में ही रहने को कहा।

जुड़वा है मंदिर की प्रतिमाएं :
भगवान परशुराम और कुश ने की थी स्‍थापना

और बना लिया निर्धनसेवा अपना लक्ष्‍य
स्वामी रामानंद ने नीलकंठवर्णी को पीपलाणा गांव में दीक्षा देकर उनका नाम ‘सहजानंद’ रख दिया। इसके कुछ ही समय बाद रामानंद जी ने जेतपुर में सहजानंद को अपने संप्रदाय का आचार्य पद भी दे दिया। इसके कुछ समय बाद स्वामी रामानंद जी का शरीरांत हो गया। अब स्वामी सहजानंद ने गांव-गांव घूमकर सबको स्वामीनारायण मंत्र जपने को कहा। साथ ही निर्धन सेवा को अपने जीवन का लक्ष्‍य बनाकर वह सभी वर्गों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश में लग गए।

शिष्‍यों को दिया पांच व्रत का संकल्‍प

स्‍वामी सहजानंद समाज में निर्धन वर्ग की सेवा करते हुए आगे बढ़ रहे थे। जो भी उनकी शरण में आता वह उसे ईश्‍वर के नाम का जप करने को कहते। साथ ही समाज के प्रति अपनी जिम्‍मेदारियों के निर्वहन की सीख देते। खास बात यह थी कि जो भी उनकी शरण में जाता है और उनके साथ रहने की इच्‍छा जताता तो वह उसे पांच व्रतों का पालन करने को कहते। इन पांच व्रतों में वह मांस, मदिरा, चोरी, व्यभिचार का त्याग कर स्वधर्म के पालन की बात शामिल थी।

देशभर में है स्‍वामीनारायण मंदिरों की श्रृंखला
भगवान स्वामीनारायण का मंदिर पूरे देश भर में है। स्‍वामी सहजानंद ने अपने कार्यकाल में अहमदाबाद (गुजरात), वडताल, मूली, धोलका, भूज, जेतलपुर, धोलेरा, गढ़डा, तथा जुनागढ़ में शिखरबद्ध मंदिरों का निर्माण कराया। उसी श्रृंखला में गोंडा के छपिया में भी स्‍वामीनारायण मंदिर का निर्माण किया गया।

श्री स्वामीनारायण मंदिर छपिया
स्वामीनारायण का जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप में हुआ था। 1792 में, उन्होंने नीलकंठ वर्णी नाम को अपनाते हुए, 11 वर्ष की आयु में भारत भर में सात साल की तीर्थ यात्रा शुरू की। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने कल्याणकारी गतिविधियां की और इस यात्रा के 9 वर्ष और 11 महीने के बाद, वह 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में, उन्हें अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हें साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया। 1802 में, अपने गुरु के द्वारा, उनकी मृत्यु से पहले, उन्हें उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया गया। सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजित की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से, वह स्वामीनारायण के रूप में जाने जाते हैं । उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप में जाना जाता है।

कैसे पहुंचें: बाय एयर
लखनऊ से छपिया – 150 किमी

ट्रेन द्वारा : मनकापुर स्टेशन से छपिया – 15 किमी

सड़क के द्वारा : अयोध्या से छपिया – 35 किलोमीटर (वाया: कटरा पारसुरामपुर)

 

BOX ITEM

गोंडा को तीर्थस्थली बना देता है यहां का छपिया स्वामीनारायण मंदिर

अगर आप को उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में किसी मंदिर में गुजरात के धर्मयात्री बहुतायत मिल जाएं तो मेरी तरह चौंकिएगा नहीं, क्योंकि यहां के छपिया इलाके में बने एक मंदिर की प्रसिद्धि और वास्तुकला गुजरातवासियों को अपनी तरफ बरबस खींच लेती है.

इस मंदिर का नाम स्वामीनारायण मंदिर है, पर यह देशभर में बने दूसरे स्वामीनारायण मंदिरों से बहुत ज्यादा अलग और खास इस लिहाज से है, क्योंकि यह स्वामीनारायण की जन्मस्थली माना जाता है. ‘पद्मपुराण’, ‘स्‍कंदपुराण’ और ‘भागवत पुराण’ में स्‍वामीनारायण के अवतार के बारे में संकेतात्मक जानकारी मिलती है.

ऐसा माना जाता है कि भगवान स्‍वामीनारायण का मनुष्‍य रूप में सन 1781 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के छपिया इलाके में जन्‍म हुआ था. उन का नाम घनश्याम पांडे (नीलकंठवर्णी) था और उन्होंने बहुत कम उम्र में ही शास्‍त्रों की शिक्षा ले ली थी. इस के बाद 11 साल की उम्र में उन्‍होंने भारत में अपनी 7 साल की तीर्थ यात्रा शुरू की थी.
एक कथा के मुताबिक, तीर्थस्‍थलों की यात्रा के दौरान नीलकंठवर्णी मंगरोल के पास लोज गांव पहुंचे थे और वहीं उन की मुलाकात स्‍वामी रामानंद महराज से हुई थी. उन्होंने ही नीलकंठवर्णी यानी स्‍वामीनारायण से आश्रम में ही रहने को कहा था.

आगे जिक्र आता है कि स्वामी रामानंद ने नीलकंठवर्णी को पीपलाणा गांव में दीक्षा दे कर उन का नाम ‘सहजानंद’ रख दिया था और उन्हीं स्वामी सहजानंद ने गांवगांव घूम कर सब को स्वामीनारायण मंत्र जपने को कहा था.

स्‍वामी सहजानंद समाज में पांच व्रतों का पालन करने को कहते थे. इन पांच व्रतों में मांस, मदिरा, चोरी, व्यभिचार का त्याग कर स्वधर्म के पालन की बात शामिल थी.

भगवान स्‍वामीनारायण का मंदिर स्‍थापत्‍य कला का बेहतरीन नमूना है. इस मंदिर के सामने एक सरोवर बना हुआ है जो मंदिर की छटा में चार चांद लगाता है. यह मंदिर काफी बड़े इलाके में फैला हुआ है और जो खूबी इसे दूसरे स्वामीनारायण मंदिरों से अलग करती है, वह है नीलकंठवर्णी के परिवार और जन्म से जुड़े वे कमरे जहां अभी भी बहुत सी पुरानी चीजें बड़े ध्यान से सहेज कर रखी गई हैं.

अगर आप भी भगवान स्वामीनारायण के इस भव्य मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो आप सड़क, वायु और ट्रेन किसी भी साधन से यहां पहुंच सकते हैं.

वायुमार्ग से यहां जाने के लिए आप को लखनऊ एयरपोर्ट से छपिया जाना पड़ेगा. लखनऊ से छपिया की दुरी लगभग 150 किलोमीटर है.

अगर आप रेलमार्ग से यहां जाना चाहते हैं, तो आप को मनकापुर रेलवे स्टेशन उतरना पड़ेगा. वहां से मंदिर की दुरी मात्र 15 किलोमीटर है.

अगर आप बस द्वारा यहां जाना चाहते हैं तो अयोध्या से छपिया (वाया कटरा, परशुरामपुर) की दूरी 35 किलोमीटर है. वैसे, अयोध्या में अब एयरपोर्ट भी बन रहा है.

यह मंदिर दोपहर के 12 बजे से दोपहर के साढ़े 3 बजे तक बंद रहता है.

गोंडा को तीर्थस्थली बना देता है यहां का छपिया

Harveer Singh

पत्रकार हरवीर सिंह राष्ट्र का निष्पक्ष दर्पण भ्रष्टाचार के खिलाफ आर पार / खबरों के साथ-साथ खुलासे भी परित्राणाय साधुनाम् यही हमारा मूल कार्य धर्म की रक्षा के लिए पूरे देश में टीम जिला तहसील लेवल पर गठित की जा रही है उसके बाद अन्य देशों में भी अपनी

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