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हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी की जयंती पर शत-शत नमन

9718976101 क्रांतिकारी पत्रकार हरवीर सिंह

गणेश शंकर विद्यार्थी एक प्रमुख भारतीय पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता थे। उनका जन्म 26 अक्टूबर 1890 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपना करियर एक क्लर्क और शिक्षक के रूप में शुरू किया, लेकिन जल्द ही पत्रकारिता और पत्रकारिता में उनकी रुचि हो गई।

गणेश युगीन पत्रकारिता हिंदी पत्रकारिता का स्वर्णिम काल माना जाता है। हिंदी पत्रकारिता के पितामह गणेश शंकर विद्यार्थी के बताए या दिखाए रास्ते पर चलकर ही पत्रकारों ने देश और समाज की सेवा की अलख जगाई है। प्रताप के पहले ही अंक में उन्होंने ‘प्रताप की नीति’ नामक लेख में राष्ट्रीय पत्रकारिता की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसे आज भी आदर्श पत्रकारिता के घोषणा पत्र के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने लिखा- समस्त मानव जाति का कल्याण हमारा परमोद्देश्य है। हम अपने देश और समाज की सेवा के पवित्र काम का भार अपने ऊपर लेते हैं। हम अपने भाइयों और बहनों को उनके कर्तव्य और अधिकार समझाने का यथाशक्ति प्रयत्न करेंगे। राजा और प्रजा में, एक जाति और दूसरी जाति में, एक संस्था और दूसरी संस्था में बैर और विरोध, अशांति और असंतोष न होने देना हम अपना परम कर्तव्य समझेंगे।

गणेश शंकर विद्यार्थी का निधन 25 मार्च 1931 में हुआ था। गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस क्यों मनाया जाता है? दंगे रोकते-रोकते ही उनकी मौत हुई थी। उन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाई और 25 मार्च 1931 को कानपुर में लाशों के ढेर में उनकी लाश मिली, उनकी लाश इतनी फूल गई थी कि लोग पहचान भी नहीं पा रहे थे।

प्रताप कानपुर से गणेश शंकर विद्यार्थी द्वारा प्रकाशित एक साप्ताहिक समाचार पत्र था। गणेश शंकर विद्यार्थी ने प्रताप के माध्यम से दोहन और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने पीड़ित किसानों, मिल मजदूरों और दलित गरीबों की पीड़ा को उजागर किए

Harveer Singh

पत्रकार हरवीर सिंह राष्ट्र का निष्पक्ष दर्पण भ्रष्टाचार के खिलाफ आर पार / खबरों के साथ-साथ खुलासे भी परित्राणाय साधुनाम् यही हमारा मूल कार्य धर्म की रक्षा के लिए पूरे देश में टीम जिला तहसील लेवल पर गठित की जा रही है उसके बाद अन्य देशों में भी अपनी

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