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जमीनी स्तर पर जीरो सामाजिक संगठन, पद की होड़ में खो रहा असली उद्देश्य।

Khulasa

रास्तों से भटकते किसान और सामाजिक संगठन, पद की होड़ में खो रहा असली उद्देश्य।

 

गौतमबुद्ध नगर। पिछले कुछ समय से जिले में किसान और सामाजिक संगठनों के रजिस्ट्रेशन की मानो बाढ़ सी आ गई है। हर गली-मोहल्ले में कोई न कोई नया संगठन बनता दिखाई दे रहा है। लेकिन चिंताजनक बात यह है कि इन संगठनों का जमीनी स्तर पर समाज सेवा या किसान हितों से बहुत कम संबंध नजर आता है। अधिकांश संगठन केवल नाम और पद की राजनीति तक सीमित होकर रह गए हैं।

जिले में सैकड़ों किसान और सामाजिक संगठन पंजीकृत हैं, लेकिन जब किसानों की समस्याओं, सामाजिक मुद्दों या जनहित के आंदोलनों की बात आती है तो इन संगठनों की सक्रियता बहुत कम दिखाई देती है। संगठन बनाने का उद्देश्य समाज में बदलाव लाना, किसानों की आवाज बुलंद करना और प्रशासन तक जनसमस्याओं को पहुंचाना होना चाहिए, लेकिन आज कई संगठन केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष या जिलाध्यक्ष बनने की होड़ तक सीमित रह गए हैं।

स्थिति यह है कि कुछ लोग दस-बीस परिचितों को जोड़कर संगठन बना लेते हैं और फिर उसी के माध्यम से अपनी पहचान बनाने की कोशिश करते हैं। कई बार यह संगठन केवल फोटो खिंचवाने, सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने और कार्यक्रमों में नाम लिखवाने तक सीमित रह जाते हैं। असली मुद्दे जैसे किसानों की फसल का उचित मूल्य, बिजली-पानी की समस्याएं, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे विषय पीछे छूट जाते हैं।

सामाजिक और किसान संगठन लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब संगठनों ने सही दिशा में काम किया है, तब-तब समाज में बड़े बदलाव आए हैं। किसानों के हक की लड़ाई, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज और जनता के अधिकारों की रक्षा में इन संगठनों की अहम भूमिका रही है। लेकिन जब संगठन केवल पद और प्रतिष्ठा का माध्यम बन जाएं तो उनका मूल उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान और सामाजिक संगठन ईमानदारी से कार्य करें तो वे जिले, राज्य और देश की प्रगति में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। संगठनों के माध्यम से शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, किसानों की समस्याओं का समाधान, युवाओं को रोजगार के अवसर और सामाजिक जागरूकता जैसे अनेक कार्य किए जा सकते हैं।

आज जरूरत इस बात की है कि संगठन बनाने वाले लोग आत्ममंथन करें और सोचें कि उनका उद्देश्य केवल पद प्राप्त करना है या वास्तव में समाज और किसानों के लिए कुछ सकारात्मक करना है। यदि संगठन सही दिशा में कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से समाज मजबूत होगा, किसानों की आवाज बुलंद होगी और देश की तरक्की की राह भी आसान बनेगी।

सच्चाई यह है कि संगठन का असली मूल्य उसके पदों से नहीं, बल्कि उसके कार्यों से तय होता है। इसलिए समय की मांग है कि किसान और सामाजिक संगठन दिखावे की राजनीति से ऊपर उठकर जनहित के कार्यों को प्राथमिकता दें, तभी इनकी उपयोगिता और विश्वसनीयता बनी रह सकेगी।

लेखक :- ओमवीर सिंह आर्य ऐडवोकेट, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्त्ता

Harveer Singh

पत्रकार हरवीर सिंह राष्ट्र का निष्पक्ष दर्पण भ्रष्टाचार के खिलाफ आर पार / खबरों के साथ-साथ खुलासे भी परित्राणाय साधुनाम् यही हमारा मूल कार्य धर्म की रक्षा के लिए पूरे देश में टीम जिला तहसील लेवल पर गठित की जा रही है उसके बाद अन्य देशों में भी अपनी

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