नोएडा के प्रसिद्ध उद्योगपति,लगभग ,10000 करोड़ की संपत्ति के मालिक, नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले के मास्टरमाइंड ,Chartered Accountant,Sunworld Builder के MD, Y K Gupta
Harveer Singh जो भ्रष्टाचार की नीम को उखाड़ने की क्षमता रखें
*क्या साथ लाए और क्या साथ ले जाओगे,मृत्यु के बाद साथ क्या जाता है?
नोएडा के प्रसिद्ध उद्योगपति,लगभग ,10000 करोड़ की संपत्ति के मालिक, नोएडा स्पोर्ट्स सिटी घोटाले के मास्टरमाइंड ,Chartered Accountant,Sunworld Builder के MD, Y K Gupta का शौक है कि मित्र बनाकर उसे गले लगाता है ,फिर उससे कर्ज लेता है जल्दी जल्दी वापिस देता है और इस कर्ज के पैसे से प्लॉट ,भवन,शेयर ,गहने खरीदता है फिर पैसे के दस गुने होने का इंतजार करता है।जब कर्ज देने वाला अपना पैसा वापिस मांगता है तो पुलिस और बाउंसर बुलवा लेता है।स्पीकर महोदय के नाम की धमकी देकर जेल भेजने की धमकी देता है।इस शुभ कार्य में उनकी पत्नी मीरा पुत्र CA मुकुल गुप्ता भी हिस्सेदार है।
इतिहास गवाह है कि लुटेरे सिकंदर ने भी धन लूटा लेकिन अंत में ये कहा कि मृत्यु के बाद मेरे दोनों हाथ कफ़न से बाहर निकाल देना ,ताकि दुनिया ये देख सके ,सबक ले सके कि मृत्यु एक अटल सत्य है और खाली हाथ आए है ,खाली हाथ जाना है।
हमारे धर्म ग्रन्थ वेद ,उपनिषद आदि के अवलोकन से भी स्पष्ट है कि जीव के शरीर के साथ कुछ नहीं जाता, केवल उसकी आत्मा निकल जाती है ।आत्मा अपने कर्मों (किए गए अच्छे-बुरे कार्यों) के अनुसार अगला जन्म लेती है कर्मों के आधार पर आत्मा को विभिन्न योनियों (पशु, वृक्ष या मनुष्य) में प्रवेश मिलता है,
आत्मा अपने साथ केवल अपने कर्म और संस्कार (अच्छे-बुरे कार्य, ज्ञान, वासनाएँ) सूक्ष्म शरीर के साथ जाते हैं और अगले जन्म का आधार बनते हैं।
गुप्ता साब की ये सोच मनुष्य के सत्कर्म के विपरीत विकर्म की श्रेणी में आती है।विकर्म का मतलब वह कार्य जो वासना, लालसा, असत्य, हिंसा या स्वार्थ (अपूर्णता के भाव) से प्रेरित होकर किया जाए ।
उदाहरण: किसी का कर्ज लेकर वापिस नहीं करना,अपितु उसे प्रताड़ित भी करना ,धन छीनना, या जानबूझकर किसी को दुःख पहुँचाना,अपने भाइयों,निकट संबंधी को धोखा देना, व्यवसाय में बेईमानी आदि।
‘अनियतविपाक’ कर्मो का फल जाति, आयु भोग के रूप में ही मिलता है,
*मृत्यु के बाद श्राद्ध करना,गया जाकर पिंड दान करना,गरुड़ पाठ,गंगा ने अस्थि विसर्जन आदि से*विकर्म के परिणाम नष्ट नहीं होते।*
गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा यमदूतों के साथ यमलोक जाती है, जहाँ कर्मों का लेखा-जोखा होता है और भारी दंड दिया जाता है फिर पुनर्जन्म होता है।
संक्षेप में, जिसका कर्ज लिया है उसको सम्मान के साथ वापिस करना ही पडेगा , प्यार से करो या पशु बनकर ,ये कर्जा लेने वाले पर निर्भर है।करनी का फल भुगतना तो पड़ेगा।अपने को कितना कोई धोखा देगा।
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