यूजीसी पर बवाल: जिला पंचायत प्रत्याशी एवं किसान नेता अमरीश चौहान हाउस अरेस्ट नजरबंद
हरवीर सिंह कुशवाहा 9718976101

यूजीसी पर बवाल: जिला पंचायत प्रत्याशी एवं किसान नेता अमरीश चौहान हाउस अरेस्ट नजरबंद
दादरी, गौतमबुद्धनगर।
UGC जैसे कानून के विरोध एवं आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू किए जाने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को नैतिक एवं संगठनात्मक समर्थन देने के लिए अपने युवा साथियों के साथ दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे जिला पंचायत वार्ड नंबर-3 दादरी के प्रत्याशी एवं किसान नेता अमरीश चौहान को आज सुबह करीब 6 बजे कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर पुलिस ने उनके आवास पर पहुंचकर हाउस अरेस्ट कर लिया।
किसान नेता अमरीश चौहान के अनुसार, उन्हें घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं, जब बड़ी संख्या में युवा साथी उनके जनसंपर्क कार्यालय, अशोक भवन, मेन मार्केट दादरी पहुंचे तो उन्हें भी प्रशासन द्वारा कार्यालय परिसर में नजरबंद कर दिया गया।
इस दौरान कार्यालय पर प्रमुख समाजसेवी अवधेश शिशौदिया, बीडीसी प्रत्याशी कुवर पाल शिशौदिया, युवा व्यपार मंडल अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष पुलकित सिंगल, एडवोकेट विशाल गुप्ता, ठाकुर अभिषेक ठाकुर, संजीव नायक रनू सहित अनेक युवा साथी मौजूद रहे।
बाद में किसान नेता अमरीश चौहान ने अपने साथियों से अपील करते हुए कहा कि जो साथी रास्ते में हैं या अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं, वे कार्यालय पर आने के बजाय सीधे जंतर-मंतर पहुंचकर चल रहे आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन दें। इसके बाद बड़ी संख्या में युवा साथी दिल्ली पहुंचे और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
“लोकतांत्रिक आवाज को दबाया नहीं जा सकता”
किसान नेता अमरीश चौहान ने कहा कि आजादी के बाद से देश ने ऐसी तानाशाही और हिटलरशाही का माहौल कभी नहीं देखा, जिसमें आम आदमी की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा हो।
पुलकित सिंहल ने कहा कि सत्ता में रहते हुए सरकारों को यह नहीं भूलना चाहिए कि जब वे विपक्ष में थीं, तब वे भी लोकतांत्रिक आंदोलनों और विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा रही हैं। सत्ता का नशा किसी भी सरकार को जनता की आवाज दबाने का अधिकार नहीं देता।
अवधेश राणा ने कहा कि प्रशासन का मूल दायित्व कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले किसान नेताओं और युवाओं को रोकना या नजरबंद करना।
“युवा शक्ति ही राष्ट्र की शक्ति है”
कुँवर पाल सिसौदिया ने कहा कि किसी भी आंदोलन को केवल नेताओं को रोककर समाप्त नहीं किया जा सकता। युवा शक्ति राष्ट्र की शक्ति है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए युवा लगातार अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
अभिषेक ठाकुर ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी भी कानून को लेकर समाज के बड़े वर्ग में गंभीर आपत्तियां हैं, तो सरकार को संवाद के माध्यम से उनका समाधान करना चाहिए। किसी भी कानून या नीति पर व्यापक चर्चा, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक सहमति आवश्यक है।
अमरीश चौहान ने कहा कि ऐसी नीतियों के रहते भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना पूरा नहीं हो सकता, यदि युवाओं और आम नागरिकों की आवाज को सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास किया जाए।
“काला कानून लागू नहीं होने देंगे”
किसान नेता ने कहा कि वे प्रशासन या शासन के दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं। वे लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को लेकर अपनी आवाज आगे भी मजबूती से उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि “इस तरह की तानाशाही नहीं चलने दी जाएगी। किसी भी ऐसे कानून, नीति या व्यवस्था का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा, जिसे जनता के हितों के विरुद्ध माना जा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में युवाओं, किसानों और आम नागरिकों को साथ लेकर बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन किया जाएगा और UGC जैसे कानून से जुड़े मुद्दों पर सरकार से व्यापक संवाद एवं पुनर्विचार की मांग की जाएगी।
अमरीश चौहान ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में असहमति देश-विरोध नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत है। जनता की आवाज को दबाने के बजाय उसे सुना जाना चाहिए।
जय जवान, जय किसान, जय मजदूर, जय व्यापारी।
वंदे मातरम्। भारत माता की जय।


