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गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य आयोजन

हरवीर सिंह कुशवाहा 9718976101

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का भव्य आयोजन
महिला दिवस मनाने के लिए कोई एक दिन जरूरी नहीं है, बल्कि हर एक दिन महिलाओं का है – डीसीपी शैव्या गोयल

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में 11 मार्च, 2026 को मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय द्वारा महिला सशक्तिकरण, समानता एवं सद्भावना थीम पर महिला दिवस कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सदरग संस्था की संस्थापक प्रो. माला भंडारी, विशिष्ट अतिथि गौतम बुद्ध नगर की डीसीपी साइबर, आईपीएस ऑफिसर शैव्या गोयल, अध्यक्ष तथा गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह तथा समन्वयक प्रो. माधव गोविन्द सिंह रहें ।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप-प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माला भंडारी ने महिला-संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के लिए बने कानून पर विस्तार से चर्चा की । उन्होंने कहा कि इस दिन के महत्व को न केवल एक उत्सव के रूप में, बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण, समानता और सद्भाव पर चिंतन के क्षण के रूप में भी रेखांकित किया गया। आज महिलाएँ केवल विकास में भागीदार नहीं हैं, बल्कि नेतृत्वकर्ता, नवोन्मेषी नीति निर्माता और भविष्य को आकार देने वाली परिवर्तनकारी शक्तियाँ हैं। उनकी आवाजें और अनुभव संस्थानों को समृद्ध करते हैं और समाज को अधिक समावेशी एवं प्रगतिशील समाज की ओर मार्गदर्शन करते हैं।

गौतम बुद्ध नगर की डीसीपी शैव्या गोयल ने कहा कि महिला दिवस मनाने के लिए कोई एक दिवस जरूरी नहीं है बल्कि हर एक दिन महिलाओं का है । साथ ही उन्होंने घर और कार्यस्थल पर महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव तथा अत्याचार पर रोक के लिए उठाए गए क़दम पर विस्तार से चर्चा की ।

कार्यक्रम के अध्यक्ष और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि समाज को प्रतिदिन प्रेरित करने का अवसर होना चाहिए। उन्होंने गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाओं के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए महिलाओं की बौद्धिक परंपरा को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने हेनरीएट्टा लैक्स का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके कैंसर कोशिकाओं से विकसित पहली अमर मानव कोशिका रेखा ने चिकित्सा अनुसंधान को नई दिशा दी, जो विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है।

मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. माधव गोविन्द ने कहा कि महिलाओं के प्रति सांस्कृतिक सम्मान के बावजूद समाज में लैंगिक असमानताएँ अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने हालिया अध्ययनों का उल्लेख करते हुए बताया कि महिलाओं द्वारा किए जाने वाले अवैतनिक घरेलू कार्य की समस्या गंभीर है और कार्यक्षेत्र में महिलाओं की अधिक भागीदारी तथा नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए ठोस संरचनात्मक बदलाव आवश्यक हैं। भारतीय भाषा एवं साहित्य विभाग की असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. रेनू यादव ने स्त्री के अधिकारों के लिए की गई पहली माँग का स्वर रोमशा द्वारा रचित ऋचा, अनामिका की कविता ‘बेजगह’ तथा अपनी तीन कविताएँ ‘मुझे चाँद मत कहो’, ‘हृदय विहीन देह’ तथा ‘रहस्यमयी औरत’ का पाठ किया ।

कार्यक्रम के समन्वयक प्रो. माधव गोविन्द, संयोजक डॉ. ममता रानी व डॉ. रेनू यादव, संचालन डॉ. ममता रानी तथा डॉ. सौम्या सिसोदिया, धन्यवाद-ज्ञापन डॉ. बिपाशा सोम ने किया । कार्यक्रम के आयोजक-मंडल में डॉ. राहुल कपूर, डॉ. बिपाशा सोम, डॉ. दिवाकर गरवा, डॉ. ओबैदुल गफ्फार, डॉ. खान मोहम्मद आसिफ, डॉ. सिद्धरामू, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. शिवानी राय, डॉ. ममता कुमारी, डॉ. गीतेश, डॉ. शोभा यादव, डॉ. रिया मौर्या शामिल रहीं ।

इस कार्यक्रम में शैक्षणिक अधिष्ठाता प्रो. राजीव वार्ष्णेय, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. मनमोहन शिशोदिया, स्कूल ऑफ बायोटेक की अधिष्ठाता प्रो. धनश्री, महिला छात्रावास की मुख्य अभिरक्षिका डॉ. निधि पाल सिंह, विभिन्न संकायों के प्राध्यापकगण डॉ. सुमित्रा हुईड्रोम, डॉ. अक्षय कुमार सिंह, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, डॉ. नीता, डॉ. गौरव, डॉ. आरती गौतम, डॉ. प्रकाश दिलारे, डॉ. विनीत, डॉ. विभावरी, डॉ. मंजरी सहित शैक्षणिक एवं -ग़ैर शैक्षणिक सदस्य तथा विद्यार्थी ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया ।

Harveer Singh

पत्रकार हरवीर सिंह राष्ट्र का निष्पक्ष दर्पण भ्रष्टाचार के खिलाफ आर पार / खबरों के साथ-साथ खुलासे भी परित्राणाय साधुनाम् यही हमारा मूल कार्य धर्म की रक्षा के लिए पूरे देश में टीम जिला तहसील लेवल पर गठित की जा रही है उसके बाद अन्य देशों में भी अपनी

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